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बक्सर में 26 करोड़ का नया ओवरब्रिज धंसा, उद्घाटन के 10 दिन बाद खुली पोल

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बिहार के बक्सर में इटाढ़ी रेलवे ओवरब्रिज का स्लैब उद्घाटन के कुछ दिन बाद धंस गया। 26.40 करोड़ रुपये की लागत से बने पुल की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं। प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है।

बक्सर/आलम की खबर:बिहार में पुलों और सड़क परियोजनाओं की गुणवत्ता को लेकर एक बार फिर बहस छिड़ गई है। इस बार मामला बक्सर जिले के बहुप्रतीक्षित इटाढ़ी रेलवे ओवरब्रिज से जुड़ा है, जहां उद्घाटन और आवागमन शुरू होने के कुछ ही दिनों बाद पुल का एक हिस्सा धंस जाने की खबर सामने आई है। करोड़ों रुपये की लागत से तैयार इस परियोजना में आई तकनीकी खामी ने स्थानीय लोगों के साथ-साथ प्रशासनिक अधिकारियों की चिंता भी बढ़ा दी है।

इटाढ़ी रेलवे फाटक पर वर्षों से लगने वाले जाम से राहत दिलाने के उद्देश्य से इस ओवरब्रिज का निर्माण कराया गया था। लंबे इंतजार के बाद जब पुल पर वाहनों का आवागमन शुरू हुआ तो लोगों को उम्मीद थी कि अब उन्हें घंटों तक रेलवे गेट पर खड़ा नहीं रहना पड़ेगा। लेकिन उद्घाटन के कुछ ही दिनों बाद सामने आई इस घटना ने लोगों की उम्मीदों को बड़ा झटका दिया है।

स्थानीय लोगों के अनुसार पुल की ऊपरी सतह का एक हिस्सा अचानक नीचे बैठ गया, जिससे सड़क की समतलता प्रभावित हो गई। मौके पर पहुंचे लोगों ने जब धंसे हुए हिस्से को देखा तो निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठाने लगे। घटना की तस्वीरें और वीडियो भी तेजी से चर्चा का विषय बन गए हैं। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इस समस्या का पता नहीं चलता तो किसी बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता था।

करीब 26.40 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित इस रेलवे ओवरब्रिज को शहर की सबसे महत्वपूर्ण आधारभूत संरचना परियोजनाओं में गिना जा रहा था। इसका उद्देश्य इटाढ़ी गुमटी पर लगने वाले जाम से लोगों को राहत देना था। वर्षों से स्थानीय लोग इस परियोजना की मांग कर रहे थे क्योंकि रेलवे फाटक बंद होने के दौरान एम्बुलेंस, स्कूल बसों और आम वाहनों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता था। यह परियोजना क्षेत्र के लाखों लोगों के लिए राहत की उम्मीद बनकर सामने आई थी। �

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घटना के बाद स्थानीय नागरिकों में आक्रोश देखा जा रहा है। कई लोगों का आरोप है कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता मानकों का पूरी तरह पालन नहीं किया गया। कुछ लोगों का कहना है कि जल्दबाजी में कार्य पूरा किया गया, जबकि कुछ ने निर्माण सामग्री की गुणवत्ता पर सवाल उठाए हैं। हालांकि इन आरोपों की अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन लोगों की मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए।

पुल धंसने की खबर सामने आने के बाद प्रशासन और संबंधित विभाग सक्रिय हो गए हैं। सुरक्षा के मद्देनजर भारी वाहनों के आवागमन पर रोक लगाने की चर्चा शुरू हो गई है और तकनीकी विशेषज्ञों द्वारा पुल का निरीक्षण कराया जा रहा है। माना जा रहा है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि आखिर स्लैब धंसने के पीछे वास्तविक कारण क्या था।

विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी पुल में इस प्रकार की समस्या कई वजहों से उत्पन्न हो सकती है। इनमें एप्रोच रोड की मिट्टी का ठीक प्रकार से सघनीकरण नहीं होना, निर्माण सामग्री की गुणवत्ता में कमी, जल निकासी की खराब व्यवस्था या तकनीकी मानकों का पालन नहीं किया जाना शामिल हो सकता है। हालांकि अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

बिहार में हाल के वर्षों के दौरान पुलों और सड़क परियोजनाओं को लेकर कई घटनाएं चर्चा में रही हैं। अलग-अलग जिलों में पुलों के क्षतिग्रस्त होने, एप्रोच रोड धंसने और निर्माणाधीन संरचनाओं में खामियां मिलने की घटनाओं ने पहले ही लोगों की चिंता बढ़ा रखी है। ऐसे में बक्सर की यह घटना राज्य में निर्माण कार्यों की निगरानी और गुणवत्ता नियंत्रण की व्यवस्था पर नए सवाल खड़े कर रही है।

जानकारों का कहना है कि किसी भी सार्वजनिक परियोजना में केवल निर्माण कार्य पूरा कर देना ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि उसकी गुणवत्ता की स्वतंत्र जांच और नियमित निगरानी भी उतनी ही आवश्यक होती है। यदि किसी पुल में शुरुआत के दिनों में ही खामी सामने आती है तो यह भविष्य की सुरक्षा को लेकर गंभीर चेतावनी मानी जाती है।

स्थानीय लोगों की मांग है कि केवल धंसे हुए हिस्से की मरम्मत करने के बजाय पूरे ओवरब्रिज का तकनीकी ऑडिट कराया जाए। उनका कहना है कि यदि एक हिस्से में समस्या सामने आई है तो बाकी संरचना की भी गहन जांच जरूरी है। इससे भविष्य में किसी बड़े हादसे की संभावना को रोका जा सकेगा।

इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि करोड़ों रुपये की लागत से बनने वाली सार्वजनिक परियोजनाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार एजेंसियां कितनी सतर्क हैं। लोग अब जांच रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं और उम्मीद कर रहे हैं कि दोषियों की जवाबदेही तय की जाएगी तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति नहीं होगी।

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बक्सर के इटाढ़ी रेलवे ओवरब्रिज में उद्घाटन के कुछ ही दिनों बाद सामने आई तकनीकी खामी केवल एक निर्माण त्रुटि नहीं बल्कि सार्वजनिक परियोजनाओं की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल है। जब जनता के पैसे से करोड़ों रुपये खर्च कर आधारभूत संरचनाएं तैयार की जाती हैं, तब उनकी मजबूती और सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

ऐसी घटनाएं यह संकेत देती हैं कि निर्माण के दौरान गुणवत्ता नियंत्रण और निगरानी व्यवस्था को और मजबूत बनाने की जरूरत है। यदि शुरुआती दिनों में ही किसी परियोजना में खामी सामने आती है तो इसकी निष्पक्ष जांच और जवाबदेही तय होना आवश्यक है। इससे न केवल जनता का भरोसा कायम रहेगा बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को भी रोका जा सकेगा।

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